
मध्य प्रदेश के जबलपुर से सामने आया एक वीडियो इस वक्त सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। वीडियो में बीजेपी नेत्री अंजू भार्गव पर आरोप है कि उन्होंने एक नेत्रहीन महिला के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक, अमानवीय और संवेदनहीन टिप्पणी की।
यह मामला सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब मानव गरिमा और दिव्यांग अधिकारों से जुड़ा गंभीर सवाल बन चुका है।
वीडियो में क्या कहा गया?
वायरल वीडियो में कथित तौर पर नेत्री यह कहते हुए सुनी जा सकती हैं, “तू इस जन्म में अंधी बनी है, अगले जन्म में भी अंधी ही बनेगी… मांग में सिंदूर भरती है और बच्ची को क्रिश्चियनों के बीच क्या कराने लेकर आती है।”
इन शब्दों ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में, बल्कि सामाजिक और मानवाधिकार संगठनों में भी तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है।
सत्ता का लहजा अगर ऐसा हो, तो सवाल विपक्ष से नहीं—पूरे सिस्टम से बनता है।

धर्मांतरण आरोप से जुड़ा है मामला
बताया जा रहा है कि यह पूरा विवाद एक चर्च में कथित धर्मांतरण के आरोप से जुड़ा हुआ है। हालांकि, वीडियो में इस्तेमाल की गई भाषा और व्यक्तिगत हमला अब मुद्दे से कहीं आगे निकल चुका है।
सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या किसी आरोप की जांच का तरीका अपमान और अभद्रता हो सकता है? क्या दिव्यांगता को गाली या श्राप की तरह इस्तेमाल करना स्वीकार्य है?
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होते ही कई यूजर्स ने इसे मानवता के खिलाफ बयान बताया। दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ताओं ने कानूनी कार्रवाई की मांग की अब तक बीजेपी की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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